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परखा बहुत गया मुझे…. लेकिन समझा नहीं गया…

मेरी ना सही तेरी होनी चाहिए , किसी एक की तो तमन्ना पूरी होनी चाहिए…

सकून की एक रात भी नहीं ज़िन्दगी में , ख्वाइशों को सुलाओ… तो यादें जाग जाती हैं …

घाटे और मुनाफे का बाज़ार नहीं… इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं…

इस जवानी से तो बचपन अच्छा था जब कुछ बुरा लगता था वही रो देते थे , अब तो रोने के लिए भी जगह ढूँढनी पड़ती है

बचपन मे सब एक ही सवाल पूछते थे …. बड़े होकर क्या बनना है ? जवाब अब मिला मुझे फिर से बच्चा बनना है

कुछ रिश्ते मुनाफ़ा नहीं देते पर ज़िन्दगी को अमीर बना देते हैं।

ये ख्वाहीशो के काफीले भी कमाल होते है…कम्बख्त गुझरते वही से है जहा रास्ते नही होते..

दूसरों को छोटा कर के खुद बड़ा बनने की कोशिश न करें।

कई बार ऐसा भी होता है. …….. इंसान किसी को हौंसला देते – देते खुद ही टूट जाता है |

उलझने मीठी भी हो सकती है , जलेबी की मिठाई इसका सबूत है…

चलता रहूँगा मै पथ पर, चलने में माहिर बन जाउंगा,या तो मंज़िल मिल जायेगी, या मुसाफिर बन जाउंगा !

सुबह की ख्वाइशें शाम तक टाली है , इस तरह हमने ज़िन्दगी सम्भाली है |

आज कल शरीफ केवल वही लोग हैं जिनके मोबाईल में password नही होता हैं।

रिश्ता सिर्फ वो नहीं जो गम या ख़ुशी में साथ दे , रिश्ता वो है जो अपनेपन का एहसास दे

क्या खूब रंग दिखती है ज़िन्दगी …. क्या इत्तेफ़ाक़ होता है , प्यार में उम्र नहीं होती , पर हर उम्र में प्यार होता है…

बोलने का हक़ छिना जा सकता है, मगर खामोशी का कभी नहीं.

क्या ओकात है तेरी ए जिन्दगी …चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..

ऐ जिंदगी तू हँस ले मेरे जीने के अंदाज़ पे,वो दिन भी आएगा जब तू संवारेगी मुझे ।।

जैसे जैसे उम्र गुजरती है एहसास होने लगता है कि माँ बाप हर चीज़ के बारे में सही कहते थे...

बचपन मे सब एक ही सवाल पूछते थे …. बड़े होकर क्या बनना है ? जवाब अब मिला मुझे फिर से बच्चा बनना है..

अपने देश में राय देने वालों की कोई कमी नहीं है इस पर आपकी क्या राय है..

सारा जहाँ उसी का है जो मुस्कुराना जानता है…रौशनी भी उसी की है जो शमा जलाना जानता है…. हर जगह मंदिर हैं लेकिन भगवान तो उसी का है जो सर झुकाना जानता हैं।

उम्र में… ओहदे में … कौन कितना बड़ा है फर्क नहीं पड़ता , लहज़े में कौन कितना झुकता है ? फर्क ये पड़ता है…

कई बार हमारे साथ कुछ ऐसे हादसे हो जाते हैं जिनके बारे में हम सोचते रहते हैं क़ि ये कब…कहाँ …कैसे और क्यों हुआ…और यकीन मानिये “प्यार” ….इनमे से सबसे खतरनाक है

रख लो आइने हजार तसल्ली के लिए..पर सच के लिए तो,आँखे ही मिलानी पड़ेगी..

शिकायत मौत से नहीं अपनों से थी , ज़रा सी आँखें क्या बंद हुई , वो कब्र खोदने लगे।

चाहतें मेमने से भी भोली हैं, पर ज़माना कसाई से भी ज़ालिम है…

पागल हो जाने के भी अपने फायदे हैं , लोग पत्थर उठा लेंगे मगर ऊँगली नहीं उठाएँगे…

बहुत अज़ीब होती है ये यादें भी मोहब्बत की..जिन पलों में हम रोए थे,उन्हें याद करके हमें हसीं आती है…और जिन पलों में हसें थे ..उन्हें याद करके रोना आता है॥

जब हम रिश्तों के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तब वक़्त हमारे बीच से रिश्ता निकाल देता है…

“क्या लिखूँ , अपनी जिंदगी के बारे में दोस्तों , वो लोग ही बिछड़ गए , जो जिंदगी हुआ करते थे” !!

हम तो मज़ाक में भी किसी का दिल दुखाने से डरते हैं , पता नहीं लोग कैसे सोच समझ कर दिलों से खेल जाते हैं…

करोड़ों में नीलाम होता है एक नेता का उतारा हुआ सूट,कचरे में फेक देते हैं शहीदों की वर्दी और बूट…

हम शतरंज नही खेलते, क्योंकि दुश्मनों की हमारे सामने बैठने कि औकात नही और दोस्तो के खिलाफ़ हम चाल नही चलते…

जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों,यहाँ से ज़िंदा बचकर कोई नही जायेगा!

बस इबादत में कमी है ज़नाब , वरना ख़ुदा तो हर जग़ह मौजूद है।

रोज स्टेटस बदलने से जिंन्दगी नहीं बदलती,जिंदगी को बदलने के लिये एक स्टेटस काफी है..!!

किसी को गीता में ज्ञान न मिला, किसी को कुरान में ईमान न मिला। उस बंदे को आसमान में क्या रब मिलेगा जिसे इंसान में इंसान न मिला।

दुनिया की सारी ख़ुशी मौजूद हो…लेकिन घर ??? में बेटी ना हो तो घर??? अच्छा नहीं लगता…

दौर नहीं रहा अब किसी से वफ़ा करने का , हद से ज्यादा प्यार करो तो लोग मतलबी समझने लग जाते है…

तुम शब्द मैं अर्थ…तुम बिन मैं व्यर्थ…

बुरा वक्त तो सबका आता है, इसमें कोई बिखर जाता है और कोई निखर जाता है .

अब हैरान नही होता अगर किसी का दिल टुटजाये.. अब तो चौक जाता हुँ किसी के प्यार कि कामयाबी पर…

कुछ अलग करना है तो जरा भीड़ से हटकर चलो.. भीड़ साहस तो देती है, लेकिन पहचान छीन लेती है ।

मसरूफ़ थे सब अपनी ज़िन्दगी की उलझनों में.. जरा सी ज़मीन हिली, सबको खुदा याद आने लगा..

रिश्ते बर्फ के गोले की तरह होते हैं,जिन्हे बनाना तो सरल है लेकिन बनाए रखना काफी कठिन होता है…

लाख समझाया उसको की दुनिया शक करती है..मगर उसकी आदत नहीं गयी मुस्कुरा कर गुजरने की.

बड़ी मुस्किल से सीखा है खुश रहना उन के बगैर अब सुना है ये बात भी उन्हे परेशांन करती है॥

लोगो से कह दो हमारी तकदीर से जलना छोड़ दे। हम घर से दवा नही ‘माँ की दुआ’ लेकर निकलते है।

बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।

फुर्सत नहीं है इन्सान को घर से मन्दिर तक जाने की..!ख्वाहिश रखता है श्मशान से सीधे स्वर्ग जाने की…!!!!

सच्चे किस्से शराब खाने में सुने वो भी हाथ मे जाम लेकर, झूठे किस्से अदालत में सुने वो भी हाथ मे गीता-कुरान लेकर…

मेरी हर ख्वाइश में सिर्फ तुम होते हो , बस दर्द ये है कि सिर्फ ख्वाईशों में ही क्यों होते हो…

दावे दोस्ती के मुझे नहीं आते यारो,एक जान है जब दिल चाहें मांग लेना..

अच्छे विचारों का असर आज कल इसलिए नहीं होता, ???? क्यूंकि लिखने वाले और पढने वाले दोनो ये समझते है कि ये दूसरों के लिए है ?

कमबख्त दिल भी कमाल करता है..जब खाली खाली होता है तो भर आता है…!!

उम्र ढलने पर समझ में ज़िन्दगी आने लगी….जब सिमटने लग गए पर, आसमाँ खुलने लगा ।।

कितना मुश्किल हे मोहबत की कहानी लिखना,जेसे पानी से पानी पर पानी लिखना ।

सब पूछते है मुझसे मौहब्बत है क्या ? मुस्करा देता हूँ मैं और याद आ जाती है माँ ।

कितनी छोटी सी दुनिया है मेरी, एक मै हूँ और एक दोस्ती तेरी…

तेरी याद से ही शुरू होती है मेरी हर सुबह..

वक़्त भी लेता है करवटे कैसी कैसी.. इतनी तो उम्र भी नहीं थी जितने हमने सबक सीख लिए…

मंजिल चाहे कितनी भी उंची क्यो ना हो दोस्तो..!! रास्ते हमेशा पेरो के नीचे होते हे..!!

कुछ तो बात है तेरी फितरत में ऐ दोस्त; वरना तुझ को याद करने की खता हम बार-बार न करते!

अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो तरीके बदलो, ईरादे नही..

बड़ा आदमी वो होता है जिस से मिलने के बाद आदमी खुद को छोटा ना समझे।

जिस नगर भी जाओ.. किस्से हैं कमबख्त बीवी के.. कोई ला के रो रहा है.. तो कोई लाने के लिए रो रहा है…

भूख रिश्तों को भी लगती है.. प्यार परोस कर तो देखिये..!

बेटी को जिसने मरवा दिया था पत्नी के कोख में,मोहल्ले में लडकिया ढूँढ रहा है नवरात्रे के कन्या भोज में।।।

सोचा था घर बना कर सकून से बैठूंगा पर घर की जरूरतों ने मुसाफिर बना दिया।

तुम कहो या ना कहो…तकाज़े सब बयां कर देते हैं…फिर चाहें बेरुखी हो या मोहब्बत !!

कमाल का ताना देती है वो अक्सर मुझे, कि लिखते तो खूब हो.. समझा भी दिया करो !!!!

प्रसन्नता पहले से निर्मित कोई चीज नहीं है..ये आप ही के कर्मों से आती है…

ये दुनिया है तेज़ धूप, पर वो तो बस छाँव होती हैं | स्नेह से सजी, ममता से भरी, माँ तो बस माँ होती हैं ||

ना हथियार से मिलते है , ना अधिकार से मिलते है , दिलो में जगह अपने व्यवहार से मिलते है…

तेरे इश्क से मिली है मेरे वजूद को ये शौहरत ,मेरा ज़िक्र ही कहाँ था तेरी दास्ताँ से पहले।

इतना खुश रहो के साला गम बी कहे गलती से मे यहा कहा आ गया।…

गलती सुधरने का मौका तो उसी दिन से मिलना बंद हो गया था ,जिस दिन हाथ में पेंसिल की जगह पेन थमा दिया गया था |

तीन चीजें जादा देर तक नहीं छुप सकती, सूरज चंद्रमा और सत्य…

ना तेरे आने कि खुशी ना तेरे जाने का गम,वो जमाना गया जब तेरे दीवाने थे हम।

यूँ तो हम दुश्मनों के काफिलों से भी सर उठा के गुजर जाते थे,खौफ तो अक्सर अपनों की गलियों से गुजरने में लगता है…!

स्वार्थ से रिश्ते बनाने की कितनी भी कोशिश करो यह बनेगा नहीं, और प्यार से बने रिश्ते को तोड़ने की कितनी भी कोशिश करो यह टूटेगा नहीं।

दूध का सार है मलाई मे और जिंदगी का सार है भलाई में …

खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती

ज़िन्दगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए समझना पड़ता है..


तुम अपने ज़ुल्म की इन्तेहाँ कर दो, फिर कोई हम सा बेजुबां मिले ना मिले…

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो ,वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं….!!

खूबसूरती से धोका, न खाइये जनाब, तलवार कितनी भी खूबसूरत क्यों न हो. मांगती तो खून ही है….!!

दीवाने लोग मेरी कलम चूम रहे है..तुम मेरी शायरी में वो असर छोड़ गई हो…

अब शिकायतेँ तुम से नहीँ खुद से है.. माना के सारे झूठ तेरे थे.. लेकिन उन पर यकिन तो मेरा था!!

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद , दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं॥

हमारी सही सोच एक नकारात्मक विचार को सकारात्मक विचार में बदल कटी हैं!!

हर चीज़ की कीमत समय आने पर ही होती है,मुफ्त में मिलता हुआ ये ओक्सिजन, अस्पताल में बहुत महंगा बिकता है।।

तुम जिन्दगी में आ तो गये हो मगर ख्याल रखना,हम ‘जान’ दे देते हैं मगर ‘जाने’ नहीं देते !!

जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की

भूखा पेट, खाली जेब, और झूठा प्रेम – इंसान को जीवन में बहुत कुछ सिखा जाता है॥

करो कुछ ऐसा दोस्ती में की ‘Thanks & Sorry’ words बे-ईमान लगे..निभाओ यारी ऐसे के ‘यार को छोड़ना मुश्किल’ और दुनिया छोड़ना आसान लगे…

रेत पर नाम कभी लिखते नहीं,रेत पर नाम कभी टिकते नहीं,लोग कहते है कि हम पत्थर दिल हैं,लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं।

दर्द जब मीठा लगने लगे तो समझ जाइये आपने जीना सीख लिया।

गलत कहते है लोग कि संगत का असर होता है,वो बरसो मेरे साथ रही, मगर फिर भी बेवफा निकली..!!

हम तो बेज़ान चीज़ों से भी वफ़ा करते हैं,तुझमे तो फिर भी मेरी जान बसी है…

मुस्कुराने के बहाने जल्दी खोजो वरना,जिन्दगी रुलाने के मौके तलाश लेगी…

“लफ्ज् दिल से निकलते हैं दिमाग से तो मतलब निकलते है.”

गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि,इंसान हमसे अच्छा नोंचता है।

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय । ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ।

सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से….या तो दोनों आते हैं …. या कोई नहीं आता !!

अन्धकार समस्या नही है, दीपक जलाने के हमारे प्रयासों का अभाव ही समस्या है ।

ना चाहते हुए भी आ जाता है, लबो पर नाम तेरा..!कभी तेरी तारीफों में…. तो कभी तेरी शिकायत मे…

अपने वजूद पर इतना न इतरा ए ज़िन्दगी…! वो तो मौत है जो तुझे मोहलत देती जा रही है…!!

अगर लोग केवल जरुरत पर ही आपको याद करते है तो बुरा मत मानिये बल्कि गर्व कीजिये क्योंकि “मोमबत्ती की याद तभी आती है, जब अंधकार होता है।”

“इश्क” का धंधा ही बंघ कर दिया साहेब।…. मुनाफे में “जेब” जले.. और घाटे में “दिल”..

सोया तो था में जिंदगी को अलविदा कह कर दोस्तों,किसी की बे-पनाह दुआओ ने मुझे फिर से जगा दिया..

सदैव अपनी छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश करें क्योंकि मनुष्य पहाड़ों से नहीं बल्कि छोटे पत्थरों से ठोकर खाता है…!!!

जब तक किस्मत का सिक्का हवा में है, तब खुद के बारे में फैसला कर लो क्योंकि जब वो नीचे आएगा तब अपना फैसला खुद सुनाएगा…

दोस्ती हर चहरे की मीठी मुस्कान होती है,दोस्ती ही सुख दुख की पहचान होती है,रूठ भी गऐ हम तो दिल पर मत लेना,क्योकी दोस्ती जरा सी नादान होती है..

इतना भी मत घुमा ऐ जिन्दगी मै शहर का शायर हु कोई MRF का टायर नही…

न जाने कब खर्च हो गये , पता ही न चला….वो लम्हे, जो छुपाकर रखे थे जीने के लिए…

हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं !समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं !!

रिश्ता हो तो रूह से रूह का हो, दिल तो अक्सर एक दूसरे से भर जाया करते हैं….

न कहा करो हर बार की हम छोड़ देंगे तुमको, न हम इतने आम हैं, न ये तेरे बस की बात है…!!

दुश्मन बनाने के लिए ज़रूरी नही लड़ा जाए! आप थोड़े कामयाब हो जाओ तो वो ख़ैरात में मिलेंगे …

ना सलाम याद रखना ना पैगाम याद रखना।छोटी सी तमन्ना है ऐ दोस्त मेरा नाम याद रखना।

तज़ुर्बा है मेरा…. मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,संगमरमर पर तो हमने …..पाँव फिसलते देखे हैं…!

इक महेबूब लापरवाह इक महोबत बेपनाह दोनो काफी हे सूकून बरबाद करने को!!

हर फैसले होते नहीं, सिक्के उछाल कर.. यह दिल के मामले है.. जरा संभल कर!!